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परम पूज्य स्वामीजी बाबा के श्रीमुख से

"साधक को पक्का विश्वास हो कि राम-नाम मेरे हृदय मे है , और इस नाम का वाच्य नामी भी वही विद्यमान है।अब मेरा हृदय परमेश्वर का आसन-स्थान है। यहां तेजोमय परम-पुरुष सुशोभित है। मेरा तन भगवान का मंदिर बन गया है।वह आनंदकंद,सर्वशक्तिमय श्रीहरि मुझमें अवतरित हो गया है और वह परमात्मदेव रात-दिन निरन्तर मेरी पालना करता है। साधक श्रद्धापूर्वक मनन करे कि अब मेरे तन में भगवान की कृपा मेरी साधना का काम आप ही आप कर रही है। मेरे सब साधन अब राम कृपा से स्वयंसिद्ध होते चले जा रहे है। जब मैं श्रीराम-चरण-शरण में सर्व भाव से समर्पित हो गया हूँ तो मुझे साधना और सिद्धि दोनों की चिंता कुछ भी नही करनी चाहिये। अब मेरी आत्मोन्नति परमात्मा श्रीराम की इच्छा से अवश्यमेव होती चली जायेगी और रोक-टोक रहित होती ही चली जायेगी।,,

श्री भक्ति प्रकाश जी में "लगन " नामक " प्रकरण से पृष्ठ - ५८

लगन लगाओ नाम में ,नामी का कर ध्यान | नामी मिलता नाम में , यही लगन का ज्ञान ||२९|| लगन लगे हरि भजन की , राम मिलन की मांग | गाढ़ लगन के भक्त जन ,जाते भाव जल लांघ ||३०|| हे राम मुझे दीजिये ,अपनी लगन अपार | अपना निश्चय अटल दे ,अपना अतुल्य प्यार ||३१|| श्री भक्ति प्रकाश जी में "लगन " नामक " प्रकरण से (पृष्ठ - ५८ )

भजन एवं ध्वनि संग्रह परम पूजनीय श्री स्वामी सत्यानन्द जी महाराज

कभी तो ऐसा अवसर आवे। मेरे सत्य स्नेही साजन, ऐसा अवसर आवे ॥ परम पुरुष के पुण्य प्रेम में, मन मग्न हो निश दिन । भक्ति -भावना भीतर गहरा, सुन्दर रंग बसावे ॥१॥ राम गीत सुन मत्त मैं झुलूं सुधा स्वाद रस पाऊँ। अविरल प्रेम जल बहे नयन से, रोम रोम हरषावे ॥२॥ राम राम की धीमी धीमी धुन, घट में जगे सुरीली । मृ्दु मधुर सुताल चाल चल, हृदय में विलसावे ॥३॥ राम -कृपा का शक्ति शान्ति से, सुखद अवतरण भी होवे । चारु चक्र सहस्त्र कमल में, विमल ज्योति जग जावे ॥४॥